सांसद निधि की सूचना पर उठे सवाल, पौड़ी की जानकारी को पूरे लोकसभा क्षेत्र का बताकर वायरल करने का आरोप

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रिपोर्ट-मुकेश बछेती

 

आरटीआई में 2024 से 2026 तक नौ प्रस्तावों का उल्लेख, तीन काम पूरे होने के बावजूद व्यय राशि शून्य दर्शाने पर उठे सवाल

पौड़ी(पहाड़ खबरसार)गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी की सांसद निधि को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ ग्राफिक्स ने अब सवाल खड़े कर दिए हैं। इन ग्राफिक्स में सांसद निधि के तहत खर्च को शून्य दर्शाते हुए इसे आरटीआई से प्राप्त सूचना बताया गया है। हालांकि, उपलब्ध कराए गए कथित सूचना पत्र की पड़ताल करने पर सामने आया कि इसमें केवल पौड़ी जिले से संबंधित जानकारी दी गई है, जबकि गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र पांच जिलों के विधानसभा क्षेत्रों में फैला हुआ है। ऐसे में पौड़ी जिले की सीमित जानकारी को पूरे लोकसभा क्षेत्र की सांसद निधि की स्थिति के रूप में प्रचारित किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं।

बताया जा रहा है कि लोक सूचना अधिकारी एवं उपायुक्त (प्रशासन), ग्राम्य विकास की ओर से दी गई सूचना में वर्ष 2024, 2025 और 2026 के दौरान गढ़वाल सांसद की ओर से कुल नौ प्रस्ताव दिए जाने का उल्लेख है। इनमें सात प्रस्ताव स्वीकृत बताए गए हैं। सूचना में तीन कार्य प्रगति पर और तीन कार्य पूर्ण दर्शाए गए हैं। हालांकि, पूर्ण हो चुके कार्यों के सामने व्यय राशि शून्य अंकित होने को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि यदि तीन कार्य पूर्ण हो चुके हैं तो उनके निर्माण पर खर्च हुआ धन शून्य कैसे हो सकता है।

मामले में यह भी सवाल उठाया जा रहा है कि इसी सूचना में अल्मोड़ा सांसद के तीन पूर्ण कार्यों का उल्लेख करते हुए उनके व्यय का विवरण दिया गया है, लेकिन गढ़वाल सांसद से संबंधित पूर्ण कार्यों के सामने खर्च शून्य दर्शाया गया है। यही विसंगति सोशल मीडिया पर वायरल ग्राफिक्स को लेकर विवाद का कारण बन रही है।

गढ़वाल लोकसभा के अन्य जिलों की जानकारी कहां?

सबसे अहम सवाल यह है कि कथित आरटीआई सूचना केवल पौड़ी जिले के कार्यों से संबंधित है, जबकि गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र में पौड़ी के अलावा टिहरी, चमोली, रुद्रप्रयाग और नैनीताल जिले के विधानसभा क्षेत्र भी शामिल हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में सांसद निधि से स्वीकृत और पूर्ण कराए गए कार्यों का विवरण उक्त सूचना में शामिल नहीं होने से इसे पूरे संसदीय क्षेत्र की सांसद निधि की तस्वीर मानना कितना उचित है, यह भी चर्चा का विषय बन गया है।

सूत्रों के अनुसार, टिहरी जिले में वर्ष 2024 से 2026 के बीच चंद्रबदनी मंदिर में मार्ग निर्माण के लिए सांसद निधि से 10-10 लाख रुपये की दो किस्तें दिए जाने की जानकारी सामने आई है। वहीं नरेंद्रनगर विधानसभा क्षेत्र में घण्टाकर्ण मंदिर में सोलर के माध्यम से पानी लिफ्टिंग और टंकी निर्माण के लिए छह लाख रुपये स्वीकृत किए गए, जिसका कार्य पूर्ण होने की बात कही जा रही है। इन कार्यों का उल्लेख वायरल हो रही कथित सूचना में नहीं है।

इसी तरह पौड़ी जिले में कोटद्वार में पासपोर्ट कार्यालय के निर्माण के लिए सांसद निधि से 12 लाख रुपये दिए जाने और अप्रैल में कार्यालय के लोकार्पण की जानकारी भी सामने आई है। पाबौ ब्लॉक के बुरांशी गांव में पिछले वर्ष आई आपदा के बाद रास्ते निर्माण के लिए भी सांसद निधि से 10 लाख रुपये दिए जाने की बात कही जा रही है। इसके अलावा अन्य कार्यों के लिए भी सांसद निधि से धनराशि स्वीकृत किए जाने का दावा किया जा रहा है।

सूचना की शुद्धता पर विभाग से स्पष्टीकरण की मांग

मामले ने अब विभागीय स्तर पर सूचना तैयार करने और उसे सार्वजनिक किए जाने से पहले उसके सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि पूर्ण हो चुके कार्यों के सामने व्यय राशि वास्तव में शून्य अंकित की गई है तो यह आंकड़ों के संधारण अथवा सूचना उपलब्ध कराने में हुई लापरवाही का मामला हो सकता है। वहीं, यदि संबंधित सूचना को संदर्भ से हटाकर पूरे गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र की सांसद निधि की स्थिति के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, तो यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि वास्तविक स्थिति क्या है।

राजनीतिक हलकों में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या विभाग ने सूचना सार्वजनिक किए जाने से पहले उसका समुचित सत्यापन किया था। यदि सूचना में त्रुटि है तो संबंधित विभाग को इसका संज्ञान लेकर वास्तविक और अद्यतन आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए, ताकि किसी जनप्रतिनिधि की छवि को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा न हो।

फिलहाल मामला लापरवाही का है या सूचना को अधूरे संदर्भ में इस्तेमाल किए जाने का, यह विभागीय स्पष्टीकरण और सांसद निधि से संबंधित आधिकारिक आंकड़े सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। जरूरत इस बात की है कि पूरे गढ़वाल लोकसभा क्षेत्र के सभी जिलों में सांसद निधि से स्वीकृत, प्रगतिशील और पूर्ण कार्यों तथा उन पर हुए वास्तविक व्यय का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किया जाए।

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