रिपोर्ट/मुकेश बछेती
पौड़ी(पहाड़ खबरसार)जनपद पौड़ी के दूरस्थ बीरोंखाल ब्लॉक के सीमांत गांव जमरिया के दो प्रगतिशील किसान आज पूरे क्षेत्र में मिसाल बनकर उभरे हैं। सिल्ली-मल्ली जिला पंचायत क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले इस गांव के सुरेंद्र सिंह रावत और मंगल सिंह चौधरी ने परंपरागत खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित किए हैं। उनकी सफलता आज क्षेत्र के युवाओं को गांव में रहकर स्वरोजगार अपनाने की प्रेरणा दे रही है।
सुरेंद्र सिंह रावत वर्ष 2021 से अपने खेतों में सेब की बागवानी कर रहे हैं। वर्तमान में उनके पास करीब 1500 फलदार सेब के पेड़ हैं। इसके अलावा वे गेहूं, धान, पत्ता गोभी, माल्टा, प्याज और लहसुन जैसी फसलों का क्लस्टर आधारित उत्पादन भी कर रहे हैं। लगभग 80 नाली भूमि पर खेती कर रहे सुरेंद्र सिंह का कहना है कि आधुनिक खेती और बागवानी के माध्यम से वे सालाना चार से पांच लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा अर्जित कर रहे हैं।
सुरेंद्र सिंह बताते हैं कि उन्हें विभिन्न सरकारी योजनाओं का भी लाभ मिला है। ट्रैक्टर, बागवानी विकास, दो पॉलीहाउस और अन्य कृषि संसाधनों ने उनके कार्य को और अधिक सशक्त बनाया है। इसके साथ ही वे मत्स्य पालन और बकरी पालन का कार्य भी कर रहे हैं। उनके कृषि उद्यम से गांव के सात से आठ लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हुआ है।
वहीं गांव के दूसरे प्रगतिशील किसान मंगल सिंह चौधरी भी सेब उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहे हैं। उनके पास वर्तमान में करीब 1500 फलदार सेब के पौधे हैं, जबकि 500 नए पौधे तैयार किए गए हैं। लगभग 50 नाली भूमि पर सेब की खेती के साथ-साथ वे अन्य सब्जियों का भी क्लस्टर आधारित उत्पादन कर रहे हैं। मंगल सिंह का कहना है कि उन्हें भी सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत ट्रैक्टर, बागवानी और अन्य कृषि उपकरणों का लाभ मिला है।
मंगल सिंह के अनुसार वे अपने बगीचों में उत्पादित कीवी को हल्द्वानी और रामनगर मंडियों में बेचते हैं। थोक बाजार में कीवी की कीमत 100 से 150 रुपये प्रति किलोग्राम तक मिल जाती है, जिससे उन्हें सालाना चार से पांच लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। उन्होंने बताया कि वे कृषि और उद्यान विभाग के माध्यम से समय-समय पर हिमाचल प्रदेश सहित अन्य कृषि उन्नत क्षेत्रों का प्रशिक्षण भी लेते हैं और वहां से प्राप्त अनुभवों को अपने गांव तथा आसपास के किसानों तक पहुंचाने का कार्य करते हैं।
दोनों किसानों का मानना है कि पहाड़ी क्षेत्रों में कृषि और बागवानी की अपार संभावनाएं हैं। यदि युवा आधुनिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं का लाभ लेकर खेती को व्यवसाय के रूप में अपनाएं तो उन्हें रोजगार की तलाश में गांव छोड़ने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
जमरिया गांव के इन दो किसानों की सफलता यह साबित करती है कि मेहनत, नवाचार और सरकारी योजनाओं के सही उपयोग से पहाड़ों में भी खेती को लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है। उनकी उपलब्धियां आज पूरे क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।














