दिवाली के साथ आखिर क्योंं मनाए जाते हैं ये पर्व, जानें कब कौन सा पड़ेगा त्योहार

0
46

रिपोर्ट/मुकेश बछेती

पौड़ी(पहाड़ ख़बरसार)सनातन परंपरा में अंधकार को दूर कर प्रकाश फैलाने वाले दीपावली महापर्व का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. धनतेरस से लेकर भाई दूज तक मनाए जाने वाली दिवाली आखिर हर साल क्यों मनाई जाती है और क्या है इससे जुड़ी मान्यता, जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख.

हिंदू धर्म में कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि से लेकर कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया तक दीपावाली या फिर कहें दिवाली के पंचमहापर्व को मनाए जाने का विधान है. दीयों से जुड़ा यह पर्व अब चंद दिनों के बाद आने वाला है. अंधेरे पर प्रकाश की विजय से जुड़े इस पर्व को लेकर अलग-अलग धर्मों में अलग-मान्यताएं हैं. मसलन कोई इसे शुभ और लाभ के देवता भगवान श्री गणेश और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा के लिए सबसे ज्यादा फलदायी मानता है तो कोई इसे अपने आराध्य के निर्वाण या फिर उसकी वापसी की खुशी में मनाता है. दिवाली पर्व से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को आइए विस्तार से जानते हैं.

हिंदू धर्म में क्यों मनाया जाता है दिवाली का पर्व

हिंदू धर्म से दिवाली के पर्व को मनाए जाने के पीछे कई प्रकार की कथा और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. इनमें से सबसे ज्यादा प्रचलित मान्यता है कि कार्तिक मास की अमावस्या के दिन ही भगवान राम लंका विजय करने के बाद अयोध्या नगरी लौटे थे. जिनके आगमन पर अयोध्यावासियों ने घी के दीये जलाकर उनका स्वागत किया था. मान्यता यह भी है कि इसी दिन समुद्र मंथन के बाद धन की देवी मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था. दिवाली को लेकर कुछ लोगों की मान्यता है कि इसी दिन पांडव 12 वर्ष का वनवास काटकर वापस लौटे थे, जबकि कुछ लोग इसे राजा विक्रमादित्य के राजतिलक का दिन मानते हैं.

हनुमान पूजा : 11 नवंबर 2023, शनिवार

नरक चौदस / दीपावली : 12 नवंबर 2023, रविवार

गोवर्धन पूजा / अन्नकूट : 14 नवंबर 2023, मंगलवार

भाई दूज : 15 नवंबर 2023, बुधवार

बौद्ध धर्म से जुड़े लोग क्यों मनाते हैं दिवाली

दिवाली को लेकर बौद्ध धर्म से जुड़ी मान्यता है कि इसी दिन उनके आराध्य भगवान गौतम बुद्ध 18 साल बाद अपनी जन्मभूमि कपिलवस्तु वापस लौटे थे. मान्यता है कि उनके अनुयायियों ने उस दिन उनका दीये जलाकर स्वागत किया था. तभी से इस धर्म से जुड़े लोग इस दिन अपने घर में दीये जलाकर इस पावन पर्व को मनाते हैं.

दिवाली को लेकर जैन धर्म से जुड़ी मान्यता
जैन धर्म से जुड़े लोगों का मानना है कि उनके 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर दिवाली के दिन ही बिहार के पावापुरी में निर्वाण की प्राप्ति हुई थी. इसी खुशी में इस धर्म से जुड़े लोग भगवान महावीर की पूजा दीया जलाकर करते हैं. हालांकि उनके साथ लोग भगवान गणेश, लक्ष्मी और मां सरस्वती की पूजा भी करते हैं.

दिवाली को क्यों कहा जाता है पंचमहापर्व
जिस दिवाली का इंतजार लोगों को पूरे साल बना रहता है, वो एक नहीं बल्कि 5 पर्वों से जुड़ा त्योहार है. जिसमें पहला धनतेरस पड़ता है, जिसमें भगवान धन्वतरि की पूजा का विधान है तो वहीं चतुर्दशी तिथि पर छोटी दिवाली मनाई जाती है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था. इसी प्रकार दीपावली के दिन भगवान श्री गणेश, माता लक्ष्मी, कुबेर देवता, माता काली और मां सरस्वती की पूजा का विधान है. चौथे दिन गोवर्धन पूजा और पांचवें दिन भाई दूज मनाया जाता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here