गढ़वाल में विकास की रफ्तार या अधूरा सफर? 2 साल बाद सांसद अनिल बलूनी के कामों की बड़ी पड़ताल

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रिपोर्ट/मुकेश बछेती

 

पौड़ी(पहाड़ खबरसार)2024 लोकसभा चुनाव के बाद उत्तराखंड की गढ़वाल सीट देश की सबसे चर्चित सीटों में रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर मिले जनादेश के बीच भाजपा ने अपने राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनिल बलूनी को मैदान में उतारा और बड़ी जीत दर्ज की। चुनाव के दौरान गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे दिग्गजों की रैलियों ने इस सीट को हाई-प्रोफाइल बना दिया था।
करीब 22 महीने के कार्यकाल के बाद अब बड़ा सवाल यही है—क्या गढ़वाल की तस्वीर बदली है या बदलाव अभी अधूरा है?
इन्फ्रास्ट्रक्चर और पर्यटन: योजनाओं की भरमार, असर आंशिक
गढ़वाल में पर्यटन और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए कई योजनाएं शुरू हुई हैं। पौड़ी में बन रहा अंतरिक्ष तारामंडल (प्लैनेटोरियम) और बंद पड़े पर्यटक गृहों का पुनर्जीवन क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रहे हैं।
धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केदारनाथ धाम और हेमकुंड साहिब में रोपवे परियोजनाओं को मंजूरी मिलना बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके अलावा तुंगनाथ क्षेत्र में बायो टॉयलेट और औली में विंटर गेम्स को बढ़ावा देने की दिशा में पहल हुई है।
हालांकि इन परियोजनाओं का पूरा असर तब ही दिखेगा जब ये समय पर पूरी होंगी और स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ाएंगी।
शिक्षा और स्वास्थ्य: बुनियादी ढांचे पर फोकस
शिक्षा के क्षेत्र में गढ़वाल को 4 केंद्रीय विद्यालयों की मंजूरी मिलना एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। कोटद्वार में पढ़ाई शुरू हो चुकी है, जबकि नरेंद्रनगर और थराली में निर्माण कार्य जारी है।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए कोटद्वार और उत्तरकाशी में ICU निर्माण कार्य चल रहा है। कोटद्वार में आर्मी बैटल अस्पताल की स्वीकृति को भी रणनीतिक और स्वास्थ्य दोनों दृष्टियों से अहम माना जा रहा है।
लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी डॉक्टरों और सुविधाओं की कमी जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।
रेल और सड़क कनेक्टिविटी: कनेक्टिविटी में सुधार की कोशिश
गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार को मजबूत रेल कनेक्टिविटी देने के प्रयास हुए हैं। कोटद्वार-आनंद विहार रात्रि ट्रेन और जनशताब्दी एक्सप्रेस की शुरुआत से यात्रियों को राहत मिली है।
देहरादून से चलने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस का नजीबाबाद में स्टॉपेज दिलाना भी एक खास उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।
सड़क नेटवर्क में भी राष्ट्रीय राजमार्गों के चौड़ीकरण और पीएमजीएसवाई के तहत बड़ी संख्या में सड़कों की स्वीकृति से कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है।
फिर भी कई पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क की गुणवत्ता और रखरखाव अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान: विरासत को पहचान दिलाने की कोशिश
कोटद्वार के कण्वाश्रम को राष्ट्रीय स्मारक बनाने की दिशा में सर्वे कार्य होना सांस्कृतिक दृष्टि से अहम कदम है।
वहीं इगास जैसे पारंपरिक लोकपर्व को राष्ट्रीय पहचान दिलाने की पहल ने स्थानीय संस्कृति को नई पहचान दी है।
पासपोर्ट कार्यालय की स्थापना जैसे कदमों ने आम जनता को सीधी सुविधा दी है।
अन्य बड़े दावे और परियोजनाएं
सांसद द्वारा कई अन्य कार्यों को भी उपलब्धि के रूप में गिनाया जा रहा है, जिनमें—
जोशीमठ में मिनी स्टेडियम
रामनगर-धनगढ़ी पुल
जनसंपर्क क्रांति ट्रेन का स्टॉपेज
वाइब्रेंट विलेज योजना
चमोली के लिए आर्थिक पैकेज
लक्ष्मण झूला क्षेत्र में बजरंग सेतु
कंडी मार्ग और लालढांग-चिलरखाल सड़क जैसे मुद्दों पर पहल
इनमें से कई परियोजनाएं अभी निर्माणाधीन हैं या शुरुआती चरण में हैं।
जमीनी हकीकत बनाम दावे
अगर समग्र रूप से देखा जाए तो गढ़वाल में विकास कार्यों की शुरुआत और गति जरूर दिखाई देती है। लेकिन अधिकतर परियोजनाएं अभी अधूरी हैं, जिससे आम जनता को उनका पूरा लाभ नहीं मिल पाया है।
स्थानीय लोगों का एक वर्ग मानता है कि “काम शुरू होना ही बड़ी बात है”, जबकि दूसरा वर्ग कहता है कि “विकास का असली मतलब तब है जब परिणाम जमीन पर दिखे।”
निष्कर्ष: शुरुआत मजबूत, मंजिल अभी दूर
गढ़वाल लोकसभा में बीते दो वर्षों में विकास की दिशा में कदम जरूर उठे हैं। सांसद अनिल बलूनी के प्रयासों से कई परियोजनाएं आईं और कुछ पर काम भी शुरू हुआ।
लेकिन “अग्रणी लोकसभा” बनने का लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुआ है। आने वाले 2-3 साल यह तय करेंगे कि ये योजनाएं गढ़वाल की तस्वीर बदल पाती हैं या नहीं।
फिलहाल गढ़वाल बदलाव के रास्ते पर जरूर है, लेकिन मंजिल तक पहुंचने के लिए रफ्तार और परिणाम—दोनों की जरूरत है।

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