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उत्तराखंड की टोपी गुजरात में बनी आकर्षण का केंद्र

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रिपोर्ट/मुकेश बछेती

देहरादून/ अहमदाबाद (पहाड़ ख़बरसार)

उत्तराखंड सहकारिता विभाग के प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन के माध्यम से हिमाचल और गुजरात राज्य के अध्ययन भ्रमण पर 13-13 सदस्य किसानों का दल पांच दिवसीय अध्ययन 

पर है। 

अध्ययन भ्रमण के प्रथम दिवस गुजरात राज्य के सुरेंद्र नगर जनपद में  मेमका पैक्स समिति का भ्रमण किया गया। उसके पश्चात खेतों में कपास जीरा की खेती की बारीकियां को जाना  सुरेंद्रनगर में कपास फैक्ट्री में भी किसानों के अध्ययन दल ने भ्रमण किया अध्ययन भ्रमण के द्वितीय दिवस जनपद आणंद में अमूल मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट में भ्रमण किया गया। किस प्रकार 36 लाख किसानों से दूध इकट्ठा कर प्रोसेसिंग किया जाता है और अमूल बटर का किस प्रकार उत्पादन किया जाता है किसानों के दल के द्वारा अमूल मिल्क यूनिट में स्थलीय भ्रमण कर जानकारी ली गई । इस अवसर पर अमूल मिल्क के प्रतिनिधियों द्वारा किसानों को अमूल मिल्क के इतिहास से लेकर सभी गतिविधियों से अवगत कराया गया  अमूल मिल्क के पश्चात आनंद कृषि विश्वविद्यालय में बीज मधुमक्खी पालन और औषधीय और शगंध  पादप के बारे में जानकारी ली गई इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों के द्वारा के द्वारा किसानों को जानकारी दी गई अगले दो दिवस किसानों के द्वारा सहकारिता से संबंधित अन्य संस्थाओं का भी भ्रमण किया जाएगा गुजरात अध्ययन भ्रमण में सहकारिता विभाग से अधिकारी भी इस दल के साथ रवाना किए गए हैं सभी किसानों के द्वारा उत्तराखंड की पारंपरिक टोपी पहनकर अध्ययन भ्रमण की किया जा रहा है उत्तराखंड की टोपी सभी संस्थाओं में कर्मचारी और किसानों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी हुई है

आजकल विश्व भर में आणंद (Amul) दूध और दूध से बने उत्पादों की बड़ी संगठन है, जिसकी मशहूरी उसके एकीकरण के कारण हो गई है। अमूल के पीछे 36 लाख किसानों का समूह खड़ा है, जो देश के विभिन्न हिस्सों से दूध इकट्ठा करके अमूल प्रोसेसिंग यूनिट में भेजते हैं। आणंद दूध संघ भारतीय किसानों का एक महत्वपूर्ण संगठन है, जो 1946 में स्थापित हुआ था। अमूल का मुख्यालय गुजरात राज्य के आनंद नगर में स्थित है। दूध और दूध से बने उत्पादों की प्रमुख ब्राण्ड के रूप में अमूल का मान्यता सम्मान भारतीय बाजार में है।

अमूल में उत्पादन प्रक्रिया एक विस्तृत और चुनौतीपूर्ण कार्य है। प्रत्येक दिन, गांवों से लाखों लीटर दूध का संग्रह होता है, जो समकक्षी 36 लाख किसानों द्वारा उत्पन्न होता है। यह दूध इकट्ठा प्रक्रिया एक अत्यधिक आयात और निर्यात संगठन है, जहां हर दिन बड़े स्थानीय क्षेत्रों से हजारों लिटर दूध की मात्रा उत्पन्न होती है। यहां तक कि यह प्रक्रिया समूह के एकीकृत माध्यम से नियंत्रित होती है, ताकि संगठन के व्यवसायिक उद्योगों में दूध और उनसे बने उत्पादों की निर्माण क्षमता में सुधार हो सके।

यह दूध अमूल प्रोसेसिंग यूनिट में पहुंचाया जाता है, जहां यह विभिन्न परिष्कृत प्रक्रियाओं से गुजरता है। सबसे पहले, दूध को सप्ताह में एक-दो बार उबालने के लिए धोने के ताल की वजह से निम्नांकित दूध को उष्ण धारिताओं में उन्मुक्त कर दिया जाता है। इसके बाद, यह उष्ण दूध उन्मुक्त कंटेनरों में शामिल किया जाता है और उसे ताल के माध्यम से पंप किया जाता है।

वायु उन्मुक्त और इथिलीन उत्पन्न करने की जरूरत के बिना, दूध में मौजूद जीवाणुओं को कम करने के लिए उष्ण दूध पर्यावरण में जल्दी से ठंडा कर दिया जाता है। जब दूध का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से कम हो जाता है, तो इसे क्रीम में अलग करने के लिए उष्ण धारिताओं में उन्मुक्त कर दिया जाता है। बाद में, इसे मोटा रेखा फिल्टर प्रक्रिया से गुजारा जाता है, जिससे बाद के उत्पादन कार्य को सही प्रकार से संचालित किया जा सके।

अमूल में शीरो प्रक्रिया के बाद, यह उत्पाद अमूल बटर के रूप में बनाया जाता है। इसके लिए, उष्ण दूध को ष्किम में अलग करने के बाद, इसे बटरिंग प्लांट में ले जाया जाता है। यहां पर उष्ण दूध लघुमत्रा में निर्यात किए जाते हैं, जिससे उसमें से पानी निकाल दिया जाता है। इसके बाद, उम्मीदवार वसा गोंद द्वारा उत्पन्न अमूल लधारित बटर को मशीन द्वारा प्रेस करते हैं, जिससे घास की तारतम्य सम्पन्न बटर उत्पन्न होती है।

अमूल बटर उत्पादन प्रक्रिया के उदाहरण से पता चलता है कि इस ब्रांड की उत्पादन प्रक्रिया केवल एकही कर्मठ और अद्यतन उपकरण में संभव है। यह स्पष्ट रूप से दूध के विकास और इसके उत्पादन की स्थायित्व के विषय में अमूल द्वारा की गई बड़ी प्रगति का प्रमाण है।

उत्तराखंड से गये 13 किसानों ने  अमूल दूध प्रोसेसिंग यूनिट की प्रक्रिया को देख कर कहा कि यह प्रक्रिया एक उन्नत और दक्ष उद्योग है, जो देश के लाखों किसानों के साथ संबंधित है।

अमूल की सफलता की गतिविधियों से यह प्रमाणित हो रहा है।

अध्ययन भ्रमण में  जनपद रुद्रप्रयाग से वीरेंद्र रावत प्रभाकर भाकुनी अल्मोड़ा , जगदीश चंद्र चंपावत, ओम प्रकाश  लखेड़ा देहरादून, सुशील चौधरी  हरिद्वार, मोहन सिंह मेहरा नैनीताल, राम सिंह पौड़ी , दुर्गा सिंह पिथौरागढ़, दलवीर सिंह चौहान उत्तरकाशी,  सहकारिता विभागीय अधिकारी  दान सिंह नपच्याल सहायक निबंधक  सुधीर सिंह लोहानी आदि शामिल है।

देहरादून रेशम फेडरेशन द्वारा निर्मित रेशम उत्पादों की खरीदारी करने पहुंची संयुक्त राष्ट्र की प्रतिनिधि एवं निर्देशक सैक्ट्रीएट यूनाईटेड नेशन फोरम ऑन फारेस्ट डॉ ज्यूलियट बाओ

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रिपोर्ट/मुकेश बछेती

पश्चिम अफ्रीका में पहली महिला वनपाल होने का गौरव है प्राप्त डॉक्टर जूलियट को

देहरादून(पहाड़ ख़बरसार)आज संयुक्त राष्ट्र की प्रतिनिधि एवं निर्देशक सैक्ट्रीएट यूनाईटेड नेशन फोरम ऑन फारेस्ट (यू0एन0एफ0एफ0) डाक्टर ज्यूलियट बाओ एवं अन्य प्रतिनिधि द्वारा अपने दो दिवसीय उत्तराखंड के भ्रमण पर  राजधानी देहरादून स्थित को-आपरेटिव रेशम फेडरेशन के सिल्क पार्क  भवन में अधिकारियों/कर्मचारियों के साथ आज फेडरेशन द्वारा विभिन्न कार्यों एवं उत्पादों की जानकारी ली गई   एवं रेशम फेडरेशन द्वारा की जा रही गतिविधियो संबंध में अधिकारियों से चर्चा की। डॉ. बियाओ ने फेडरेशन द्वारा जनजाति एवं अन्य दुर्बल वर्ग के लोगों के लिये संचालित योजनाओं की प्रशंसा की गई एवं सिल्क पार्क में बुनाई कार्यशाला में तैयार किये जा रहे उत्पादों का निरीक्षण किया गया। डाक्टर ज्यूलियट बाओ के पास औद्योनिक, कृषि एवं वन के क्षेत्र में प्रचुर अनुभव है। उनके द्वारा 32 से अधिक वर्षों तक अफ्रिका, लैटिन अमेरिका आदि मेें जटिल प्रबंधन कार्य किये गए जिनमें पर्यावरण, लैगिंक समानता के क्षेत्र में उनके द्वारा कार्य किया गया उन्हें पश्चिम अफ्रीका में पहली महिला वनपाल होने का गौरव भी प्राप्त है। डॉ. बियाओ ने संरक्षित क्षेत्रों के सहभागी प्रबंधन सहित अभूतपूर्व पहल की शुरुआत की है।

भ्रमण के उपरान्त डा0 बाओ ने दून सिल्क के रिटेल स्टोर से विविध प्रकार से देहरादून में निर्मित रेशम के वस्त्रों का क्रय भी किया उनके द्वारा देहरादून में  निर्मित रेशम के वस्त्र की गुणवत्ता की प्रशंसा की गई

इस अवसर में, प्रबंध निदेशक आनंद  शुक्ल श्री प्रदीप कुमार, प्रबंधक   मातबर कण्डारी, टैक्स इंजी  अकिंत खाती,  अनिल डोभाल,  दर्षन सिंह,  नेहा खाती सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।

उत्तराखंड के इतिहास में पहली बार किसानों को भेजा जा रहा अध्ययन भ्रमण पर

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रिपोर्ट/मुकेश बछेती

उत्तराखंड से 13 किसानों का दल हिमाचल अध्ययन भ्रमण के लिए रवाना हिमाचल में विभिन्न संस्थाओं में बागवानी का करेंगे अध्ययन

देहरादून(पहाड़ ख़बरसार)देहरादून मियां वाला निबंधक मुख्यालय से  13 किसानों का दल हिमाचल के लिए आज बृहस्पतिवार सुबह 10:00 बजे पांच दिवसीय अध्ययन भ्रमण पर रवाना हुआ

सहकारिता मंत्री उत्तराखंड डॉक्टर धन सिंह रावत के द्वारा सहकारिता विभाग के अधिकारियों को समीक्षा बैठक में निर्देश दिए गए थे प्रदेश के उत्कृष्ट किसानों को विभिन्न राज्यों में अध्ययन भ्रमण के लिए भेजा जाए जिस के क्रम में आज पहले दल को रवाना किया गया यह अध्ययन भ्रमण सहकारिता विभाग के प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन के माध्यम से भेजा जा रहा है

अध्ययन भ्रमण के पश्चात यह सभी किसान अपने जनपदों में गोष्टी के माध्यम से अन्य किसानों को भी प्रशिक्षण देंगे 

सहकारिता मंत्री डॉ धन सिंह रावत का यही उद्देश्य है कि उत्तराखंड के किसानों की आय को दोगुना से भी अधिक बढ़ाया जा सके

सहकारिता विभाग के द्वारा प्रत्येक जनपद से दो उत्कृष्ट मॉडल किसानों को अध्ययन भ्रमण हेतु भेजा जा रहा है इन किसानों का चयन सभी जनपदों के जिलाधिकारी की अध्यक्षता में चयन कमेटी द्वारा किया गया है 

 निबंधक मुख्यालय मियांवाला में आज अपर निबंधक ईरा उप्रेती संयुक्त निबंधक  श्री  एमपी त्रिपाठी  द्वारा 13 सदस्यीय किसानों के दल को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया  इस अवसर पर प्रबंध निदेशक प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन श्री  मान सिंह सैनी भी उपस्थित रहे

प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन के प्रबंध निदेशक मानसिंह सैनी ने बताया किसानों का यह दल पहले दिन 27 तारीख को  सोलन स्थित डॉक्टर वाई एस परमार यूनिवर्सिटी का भ्रमण करेंगे उसके पश्चात द्वितीय दिवस पर रीजनल हॉर्टिकल्चर रिसर्च और ट्रेनिंग स्टेशन शिमला में अध्ययन करेंगे और 29 अक्टूबर को कृषि विज्ञान केंद्र शिमला का भ्रमण कर  किसानों के पर्वतीय फल सेब  कीवी के बगीचों में ग्राउंड जीरो पर अध्ययन करेंगे 

उसके पश्चात दूसरा दल 28 अक्टूबर को गुजरात को हवाई मार्ग से रवाना किया जाएगा जहां दुग्ध दुग्ध उत्पादों के क्षेत्र में किसानों के द्वारा अध्ययन भ्रमण किया जाएगा

अध्ययन भ्रमण पर जा रहे किसानों ने सहकारिता मंत्री डॉ धन सिंह रावत और सहकारिता विभाग की भूरि भूरि प्रशंसा की किसानों ने कहा उत्तराखंड में यह पहली बार है जब किसानों को अध्ययन भ्रमण पर भेजा जा रहा है इस अध्ययन भ्रमण के परिणाम निश्चित ही किसानों के लिए लाभकारी होंगे ।

एक साल से उत्तर प्रदेश से लापता हुए बुजुर्ग को पौड़ी पुलिस ने परिजनों से मिलाया

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रिपोर्ट/मुकेश बछेती

पौड़ी(पहाड़ ख़बरसार)24 अक्टूबर को कोतवाली लैन्सडाउन की चौकी गुमखाल पर एक स्थानीय व्यक्ति ने सूचना दी की सोशल मीडिया पर उत्तर प्रदेश के किसी बुजुर्ग व्यक्ति के लापता होने की फोटो प्रकाशित हो रही है और उन्होंने उसी शक्ल सूरत के एक व्यक्ति को सतपुली गुमखाल रोड पर देखा है। इस सूचना पर पुलिस टीम तुरंत ही सतपुली गुमखाल रोड पर गुमशुदा व्यक्ति को ढूंढते हुए मौके पर पहुँचे तो देखा कि एक व्यक्ति सतपुली गुमखाल रोड़ पर बैठा हुआ है। जिस पर पुलिस टीम द्वारा उक्त व्यक्ति से मित्रता पूर्ण माहौल में वार्ता की गयी तो वह व्यक्ति स्पष्ट रूप से अपना पता नहीं बता पा रहा था। जिस पर पुलिस टीम द्वारा उक्त व्यक्ति का आधार कार्ड लिया गया तो उक्त व्यक्ति का नाम लालजी वर्मा पुत्र स्व0 हरिलाल वर्मा, निवासी गांव शिवनगर, कोतवाली विलरियागंज, आजमगढ़ उत्तर प्रदेश व उम्र 72 वर्ष होना पाया गया। पुलिस टीम द्वारा थाना विलरियागंज से सम्पर्क किया गया तो उनके द्वारा बताया गया कि उक्त व्यक्ति के परिजनों द्वारा 01 वर्ष पूर्व थाना विलरियागंज पर उक्त व्यक्ति की गुमशुदगी दर्ज करायी थी, विलरियागंज पुलिस एवं परिजनों द्वारा गुमशुदा लालजी वर्मा को तलाशने का हर संभव प्रयास किया गया किन्तु इनका कहीं पता नहीं चल पाया। पुलिस टीम द्वारा उक्त गुमशुदा व्यक्ति के परिजनों का नम्बर लेकर सम्पर्क किया गया तो उनके पुत्र अमरनाथ वर्मा द्वारा बताया गया कि हम पूरे परिवार सहित कल सुबह तक चौकी गुमखाल पहुँच जायेंगे। जिस पर पुलिस टीम द्वारा रात्रि में सुरक्षा की दृष्टि से उक्त व्यक्ति को चौकी गुमखाल लाए व खाना खिलाकर इनके रहने की व्यवस्था की गयी। आज दिनाँक 25.10.2023 को परिजनों के चौकी गुमखाल पहुँचने पर पुलिस टीम द्वारा गुमशुदा श्री लालजी को सकुशल परिजनों के सुपुर्द किया गया। श्री अमरनाथ वर्मा ने अपने अपने पिता को सकुशल पाकर पौड़ी पुलिस का धन्यवाद अदा करते हुये बोले जीवन की अनमोल खुशी देने के लिये आजीवन पौड़ी पुलिस के आभारी रहेंगे।

पुलिस टीमः-

  1. वरिष्ठ उपनिरीक्षक श्री मुकेश भट्ट
  2. उपनिरीक्षक श्री वेद प्रकाश
  3. आरक्षी श्री शेखर सैनी- एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट
  4. आरक्षी श्री मनोज नेगी- एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट
  5. आरक्षी श्री चन्द्रपाल
  6. आरक्षी श्री कपिल
  7. होमगार्ड श्री नितेश
  8. होमगार्ड श्री पंकज

केंद्रीय रेशम बोर्ड  शत प्रतिशत वित्तीय सहायता और तकनीकी सहायता में करेगा सहयोग शीघ्र भेजें प्रस्ताव : पी शिवकुमार

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रिपोर्ट/मुकेश बछेती

देहरादून(पहाड़ ख़बरसार)
फेडरेशन द्वारा कार्यों की सदस्य सचिव द्वारा की गई  प्रशंसा

केन्द्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय, भारत  सरकार के नव नियुक्त सदस्य सचिव पी0 शिव कुमार (आई0एफ0एस0) द्वारा अपने दो दिवसीय भ्रमण कार्यक्रम में केन्द्रीय रेशम बोर्ड के राजधानी देहरादून में स्थित  संस्थानों के साथ-साथ रेशम निदेशालय उत्तराखण्ड एवं उत्तराखण्ड को-आपरेटिव रेशम फेडरेशन के प्रेमनगर-देहरादून मुख्यालय के साथ राजकीय रेशम फार्म  झाजरा, ग्रोथ सेन्टर सेलाकुई का भ्रमण किया गया     

सदस्य सचिव भारत सरकार द्वारा सर्वप्रथम सिल्क पार्क,  स्थित रेशम फेडरेशन के मुख्यालय पर अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह, प्रबंध निदेशक, आनन्द शुक्ला, निदेशक रेशम,  श्री प्रदीप कुमार, केन्द्रीय रेशम बोर्ड के अधिकारियों की उपस्थिति में फेडरेशन की वर्तमान की जा रही गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की गई। बैठक के दौरान प्रबंध निदेशक   द्वारा   भविष्य की योजनाओं को लेकर केन्द्रीय रेशम बोर्ड, भारत सरकार से वित्तीय एवं तकनीकी सहयोग की अपेक्षा की गई। सदस्य सचिव केन्द्रीय रेशम बोर्ड द्वारा इसी वित्तीय वर्ष में फेडरेशन की और से प्राप्त होने वाले प्रस्तावो    हेतु शत प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान करने का आष्वासन दिया गया एवं सुझाव दिया गया कि आगामी 15 दिनों में एक विस्तृत परियोजना प्रस्ताव केन्द्रीय रेशम बोर्ड भारत सरकार को उपलब्ध करा दें, जिस पर शीघ्र आपको सहायता प्रदान की जायेगी। 

सदस्य सचिव भारत सरकार द्वारा फेडरेशन  द्वारा वर्तमान में की जा रही गतिविधियों की प्रशंसा की गई एवं सुझाव दिया गया कि आगामी 1 माह के अन्दर सभी उत्पादों पर उनकी विषिष्टता एवं बुनकर/लाभार्थी के विववरण वाले क्यू आर कोड लगा लिये जायें, जिसके लिये केन्द्रीय रेषम बोर्ड, आपको हर संभव सहायता प्रदान करेगा। केन्द्रीय रेषम बोर्ड द्वारा सिल्क पार्क में प्रस्तावित ‘‘ रेशम घर‘‘ का भी भौतिक निरीक्षण किया गया। उसके बाद सदस्य सचिव, केरेबो, भारत सरकार द्वारा ग्रोथ सेन्टर सेलाकुई में रेषम धागाकरण इकाई, साड़ी उत्पादन इकाई एवं कोया बाजार आदि का भ्रमण किया गया जहां पर स्थापित अवस्थापना सुविधाओं के बारे में जानकारी प्राप्त की गई। 

सदस्य सचिव द्वारा ग्रोथ सेन्टर सेलाकुई में निदेषक, रेषम को सुझाव दिया गया कि यदि फेडरेषन को दूनसिल्क के उत्पादों के पूर्ण मूल्य श्रंखला में कोई अवस्थापना सुविधिा की आवश्यकता हो तो सिल्क समग्र-2 में कोसोत्तर सेक्टर में उपयुक्त योजना का लाभ प्राप्त कर सकते हैं, यदि संघ की और से प्रस्ताव प्राप्त होता है तो के0रे0बो0, भारत सरकार, प्राप्त प्रस्तावों को प्राथमिकता पर वित्तीय सहायता करेगी।

दिनांक 20/10/2023 को दोपहर बाद रेषम निदेषालय उत्तराखण्ड, प्रेमनगर-देहरादून के मुख्यालय मंे निदेषक रेषम श्री प्रदीप कुमार जी द्वारा उनको औपचारिक स्वागत किया गया एवं रेषम निदेषालय की वर्तमान गतिविधियों, संचालित योजनाओं एवं प्रगति से सदस्य सचिव , केन्द्रीय रेषम बोर्ड, भारत सरकार  को अवगत कराया गया जिसमें विभागीय अधिकारियों के अतिरिक्त केन्द्रीय रेषम बोर्ड, नई दिल्ली, के अधिकारी, देहरादून में अवस्थित केन्द्रीय रेषम बोर्ड के अधिकारी भी सम्मिलित थेे। 

सदस्य सचिव द्वारा निदेषक रेषम को सुझाव दिया गया कि राज्य में गुणवत्ता युक्त रेषम बीज उत्पादन हेतु स्पष्ट नीति होनी चाहिये जिसके लिये उन्हें सरकार के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिये एवं राज्य में बसंत और मानसून फसलों के अतिरिक्त एक अन्य कामर्षियल रेषम फसल प्रारभ्म करनी चाहिये एवं प्रदेष में चारों प्रकार के रेषम उत्पादन बढ़ाने हेतु ज्यादा से ज्यादा भौज्य पौघों का वृक्षारोपण का चरणवद्ध कार्य करना चाहिये जिससे आने वाले समय में राज्य में रेषम उत्पादन के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकेगा और उत्तराखण्ड राज्य हिमालयी राज्यों में रेषम उत्पादन में प्रतिस्पर्धा में उच्चतम स्थान पर होगा। 

केन्द्रीय रेशम बोर्ड के सदस्य सचिव द्वारा निदेषक रेषम केेन्द्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय भारत सरकार की और से हर संभव सहायता एवं सभी परियोजना के लिये समयवद्ध ढ़ंग से धनराषि का आवंटन एवं धनराषि उपलब्ध कराने का शत प्रतिषत प्रयास किया जायेगा जिससे किसी विकास एवं स्वरोजगार की योजना/परियोजना पर कोई प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। 

इस अवसर पर उक्त के अतिरिक्त रेषम विभाग के सहायत निदेषक श्री विनोद तिवारी, प्रबंधक रेषम फेडरेषन  मातबर कण्डारी के साथ केन्द्रीय रेषम बोर्ड के क्षेत्रीय संस्थान के प्रभारी वैज्ञानिक डा0 एस0एस0 चौहान, वैज्ञानिक-डी, श्री सुरेन्द्र भट्ट, वैज्ञानिक-डी, श्री सरदार सिंह, वैज्ञानिक डी सहित  विभागीय अधिकारी /कर्मचारी उपस्थित थे। 

सहकारिता विभाग के अधिकारी अब जिलों में योजनाओं का करेंगे मॉनिटरिंग मंत्री  लेंगे  अधिकारियों से फीडबैक

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समितियां को घाटे से उबारने के लिए अधिकारी बनाए माइक्रो प्रॉफिट प्लान-डॉ धन सिंह

सहकारी समितियां में 30% महिलाएं सदस्य अनिवार्य रूप से बनाए

देहरादून(पहाड़ ख़बरसार)

सहकारिता मंत्री डॉ रावत आज रविवार को राज्य समेकित सहकारी विकास परियोजना सभागार में सहकारिता विभाग के राज्य और जिला  स्तरीय की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश स्तरीय सहकारिता अधिकारी प्रत्येक जनपद में सहकारिता की योजनाओं की समीक्षा करेंगे और उन्हें रिपोर्ट देंगे उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।  समीक्षा बैठक में सहकारिता मंत्री द्वारा विभाग द्वारा संचालित योजनाओं की प्रगति समितियां में नए सदस्यों का पंजीकरण  साथ ही  वन टाइम सेटलमेंट योजना, माधो सिंह भंडारी सामूहिक सहकारिता खेती , जन औषधि केंद्र और पिछले 6 महीने की सभी बैंकों के लाभ की प्रगति रिपोर्ट जनपदवार जानी। वन टाइम सेटलमेंट योजना में नैनीताल जनपद और सबसे अधिक सदस्य बनने में पौड़ी जनपद की सहकारिता मंत्री ने प्रशंसा की।

निबंधक सहकारी समितियां श्री आलोक कुमार  पांडेय ने बताया कि अभी तक सहकारी समितियां में 2 लाख नए सदस्यों के लक्ष्य को प्राप्त करते हुए करीब  82 हज़ार  सदस्य बनाए जा चुके हैं इसके साथ ही वन टाइम सेटलमेंट योजना का अच्छा रिस्पांस मिलने के कारण इसे 30 नवंबर तक बढ़ा दिया गया है। उन्होंने बताया कि,  इन  दिनों  धान , मंडवा, खरीद हो रही है किसानों के आग्रह करने पर इस योजना को नवंबर तक बढ़ा दिया गया है इसके साथी इसलिए वित्तीय वर्ष में प्रदेश के जिला सहकारी बैंक 180 करोड़ के मुनाफे में थे इस वर्ष यह है प्रॉफिट 200 करोड़ के पार की उम्मीद है

सहकारिता मंत्री डॉ रावत ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिए की प्रदेश की जितनी भी समितियां घाटे में चल रही हैं इसको लेकर एक माइक्रो प्रॉफिट प्लान बनाया जाए जिससे एक वर्ष में यह सभी समितियां फायदे में आ जाए प्रत्येक महीने सभी शीर्ष अधिकारी जनपदों में जाकर इसकी समीक्षा करें। इसके साथ ही दीनदयाल उपाध्याय ऋण वितरण योजना के 5 वर्ष पूरे होने जा रहे हैं 5 वर्ष पूरे होने पर इस योजना के स्वरूप को लेकर चर्चा की जानी है कैसे यह योजना किसानों के लिए अधिक लाभकारी हो इस योजना में ऋण वितरण की प्रणाली में ऋण वितरण कमेटी के माध्यम से किया जाए जिसमें क्षेत्र के दो बुद्धिजीवी और एक ब्लॉक या जिले का प्रतिनिधि होगा जिले का सीडीओ भी इस ऋण वितरण के आवेदन की समीक्षा करेंगे इस प्रक्रिया से ऋण वितरण में पारदर्शिता आएगी,

बैठक में निबंधक सहकारिता श्री आलोक कुमार पांडेय, जिला सहकारी बैंक टिहरी के अध्यक्ष सुभाष रमोला , अपर निबंधक ईरा उप्रेती, अपर निबंधक श्री आनंद शुक्ल, संयुक्त निबंधक श्री एमपी त्रिपाठी, उपनिबंधक और यू सी एफ की प्रबंध निदेशक रामिन्द्री मंद्रवाल,   सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।

उत्तराखंड के किसान हिमाचल और गुजरात से सेब कीवी  पर्वतीय फलों  कृषि डेयरी ओर डेयरी उत्पादों का करेंगे अध्ययन

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रिपोर्ट/मुकेश बछेती

देहरादून(पहाड़ ख़बरसार)प्रदेश के 26  किसान हिमाचल और गुजरात के पांच दिवसीय अध्ययन भ्रमण पर 26 अक्टूबर को होंगे रवाना

सेब कीवी और पर्वतीय फलों के अध्ययन हेतु हिमाचल और कृषि डेयरी ओर डेयरी उत्पादों के अध्ययन भ्रमण के लिए गुजरात जाएंगे  13 –  13  चयनित किसान

प्रत्येक जनपद से दो किसानों का अध्ययन भ्रमण को लेकर चयन हो गया है चयन समिति के द्वारा चयनित यह सभी 26 किसान  13 – 13  की संख्या में अलग-अलग हिमाचल और गुजरात के पांच दिवसीय अध्ययन भ्रमण पर इसी महीने 26 अक्टूबर को रवाना होंगे प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन के द्वारा यह अध्ययन भ्रमण करवाया जा रहा है  अध्ययन भ्रमण को लेकर निबंधक सहकारी समितियां आलोक पांडे द्वारा आदेश जारी कर दिया गया है

सहकारिता विभाग इन उत्कृष्ट किसानों को हिमाचल और गुजरात के पांच दिवसीय अध्ययन भ्रमण पर भेज रही है

 अध्ययन भ्रमण के पश्चात इन सभी किसानों के द्वारा  किसान सेमिनार सहकारिता सम्मेलन  और अन्य किसानों को प्रशिक्षित करने के लिए  भेजा जाएगा जिससे यह अन्य   सेब कीवी डेयरी   उद्यान कृषि के क्षेत्र से जुड़े किसानों को भी प्रशिक्षण दे सकें  ।

उत्तराखंड सहकारिता: ओटीएस में 16 करोड़ की वसूली हुई, 30 नवंबर तक बढ़ी तारीख

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रिपोर्ट/मुकेश बछेती

देहरादून(पहाड़ ख़बरसार) 13 सितंबर 2023!
सहकारिता मंत्री डॉ धन सिंह रावत के निर्देश पर निबंधक उत्तराखंड सहकारी समितियां ने
07 जुलाई 2023 ने प्रदेश की प्राथमिक कृषि ऋण सहकारी समितियों में “एमपैक्स एकमुश्त समाधान योजना* (MPACS OTS) के संचालन हेतु दिशा-निर्देश प्रेषित करते हुये समस्त जिला सहायक निबन्धक, सहकारी समितियाँ उत्तराखण्ड एवं समस्त सचिव / महाप्रबन्धक, जिला सहकारी बैंक लिए, को उनके जनपद अन्तर्गत समस्त एमपैक्सों में 30 सितम्बर 2023 तक संचालित होने वाले एमपैक्स एकमुश्त समाधान योजना में अधिक से अधिक मृतक बकायेदार सदस्यों के गारण्टरों / आश्रितों / वारिसान से बकाया ऋण की वसूली एवं मृतक सदस्य के बकाया ऋण की शत-प्रतिशत ब्याज माफी हेतु आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिए थे।

जिसमें, 07 जुलाई 2023 से दिनांक 30 सितम्बर 2023 तक प्राप्त कुल 8594 आवेदनों के माध्यम से कुल रू0 16.08 करोड़ मूलधन की वसूली हुई है। मंत्री डॉ रावत के निर्देश पर अपर निबंधक ईरा उप्रेती ने इस योजना को एमपैक्स के 31 हज़ार मृतक बकायादारा के परिजनों के लिए 30 नवम्बर तक बढ़ा दिया गया है।

गौरतलब है कि एमपैक्स का सालों से यह पैसा डूबा हुआ था, जिसका रास्ता सहकारिता मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने निकाला। उन्होंने इसके लिए कई समीक्षा बैठक की और अधिकारियों को लक्ष्य के साथ काम करने का निर्देश दिए। इसी के परिणाम स्वरूप 16 करोड़ 8 लाख रुपए जमा हुए हैं। यह पैसे 70 और 80 के दशक से डूबे हुए थे। जिस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा था। इन पैसों को मृतक बकायेदारों के परिजनों के जमा कर रहे हैं यह मूलधन जमा हो रहा है। इसका ब्याज मंत्री डॉ रावत ने निर्देश पर की 40% बैंक और 60% समितियां वहन कर रही हैं।

सहकारी समितियों के डूबे इस पैसा के लौटने से सहकारिता विभाग की संस्थाएं बैंक और समितियां मजबूत हो रही हैं। एनपीए वसूली अभियान तो हर जगह चलता है लेकिन मृतक बकायेदारों पर आज तक ध्यान नहीं जाता था, उत्तराखंड में इस पर ध्यान दिया गया! जिसमें सफलताएं मिल रही हैं!30 नवंबर तक और सफलताएं मिलने की उम्मीद की जा रही हैं।

निकाय चुनाव से पहले मंडल मुख्यालय पौड़ी को मिलेगी E-ऑटो की सौगात-यशपाल बेनाम,पालिक अध्यक्ष

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रिपोर्ट-मुकेश बछेती

पौड़ी(पहाड़ ख़बरसार)मंडल मुख्यालय पौड़ी को निकाय चुनाव से पहले ई-ऑटो की सौगात मिलने जा रही है जिसके लिए ट्रायल भी पौड़ी की सड़कों में चल रहा है अब अंतिम ट्रायल के बाद ई- ऑटो पौड़ी की सड़कों में दौड़ते हुए नजर आएंगे आज जिला मुख्यालय पौड़ी में ई-ऑटो का ट्रायल किया गया,ई- ऑटो ट्रायल के लिए तीन सदस्यों का दल चयनित किया गया था

जिसमें नया तहसीलदार, कोतवाल पौड़ी और परिवहन अधिकारी ट्रायल में मौजूद रहे। इस दौरान पौड़ी बस स्टेशन से ई- ऑटो एजेंसी चौक, नया बस अड्डा, कंडोलिया मंदिर होते हुए आरटीओ ऑफिस के रास्ते नीचे उतारा। नगर पालिका अध्यक्ष यशपाल बेनाम ने बताया कि जिस तरह से ही पौड़ी में ई ऑटो दौड़ रहा है जिसको देखकर उन्हें पूरी उम्मीद है कि इसका ट्रायल भी मानकों के अनुसार सफल रहेगा। तो आने वाले कुछ समय में चुनिंदा मार्गो में ही ई- ऑटो को चलाया जाएगा। जिससे आवाजाही के लिए आमजन को सुविधा उपलब्ध कराई जा सकेगी। वहीं परिवहन अधिकारी आनंद वर्धन ने बताया कि जिस तरह से ई ऑटो चढ़ाई में भी आसानी से चल रहा था इससे प्रतीत होता है कि पौड़ी में इसका संचालन कराया जा सकता है। उन्होंने बताया कि आने वाली एक दो दिनों में और मानकों में ई-ऑटो का ट्रॉयल लिया जाएगा। जिसके बाद मंडल मुख्यालय पौड़ी की सड़कों में ई ऑटो को चलाने का परमिट जारी करने का फैसला लिया जाएगा।

मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय में ली सहकारिता विभाग के तहत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों के सम्बन्ध में बैठक

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रिपोर्ट/मुकेश बछेती

देहरादून(पहाड़ ख़बरसार)
मुख्य सचिव डॉ. एस.एस. संधु ने सचिवालय में सहकारिता विभाग के तहत प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के सम्बन्ध में बैठक ली। मुख्य सचिव ने कहा कि प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (पैक्स) के माध्यम से प्रदेश के गरीब तबके की आर्थिकी को बढ़ाया जा सकता है।


मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को पैक्स के कम्प्यूटराइजेशन कार्य को शीघ्र पूर्ण किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों को जनपद की सभी पैक्स का निरीक्षण किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने जिला स्तरीय निगरानी एवं कार्यान्वयन समितियों के अंतर्गत पैक्स की समीक्षा किए जाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पैक्स को अधिक से अधिक रोजगार उपलब्ध कराकर छोटे किसान, गरीब मजदूरों आदि को सीधे लाभ प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि गैस वितरण एजेंसियों और पेट्रोल पम्पों आदि आबंटन में पैक्स को वरीयता दी जाए। उन्होंने जिलाधिकारियों को इसके लिए पैक्स द्वारा निर्धारित तिथि तक आवेदन कराये जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि केन्द्र सरकार की विकेन्द्रीकृत अन्न भण्डारण योजना के तहत प्रत्येक जनपद में अन्न भण्डारण हेतु भूमि चयनित कर पैक्स को आबंटित की जाए। पैक्स को इसके संचालन के लिए अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा कि इसमें स्वयं सहायता समूहों को भी शामिल किया जाए। उन्होंने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के खरीद और वितरण में भी पैक्स को शामिल किए जाने की बात कही। कहा कि इससे उत्पादों को खरीद कर बेचने की प्रक्रिया भी छोटी होगी, क्योंकि दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों के उत्पादों को खरीद कर नीचे लाया जाता है, फिर वापस पर्वतीय क्षेत्रों और दूरस्थ क्षेत्रों में वितरण के लिए भेजा जाता है। उन्होंने कहा कि पैक्स के माध्यम से खरीद कर वितरित करना और अन्न भडारण गृहों में रखे जाने से ये प्रक्रिया आसान हो जाएगी। उन्होंने कहा कि बिचौलियों को भी दूर रखा जा सकेगा, और लाभ सीधे स्थानीय पैक्स सदस्यों और किसानों को होगा। उन्होंने गन्ना समितियों को भी इसमें शामिल करते हुए अधिक से अधिक प्राथमिक कृषि ऋण समितियां तैयार की जाने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने प्रदेश के खाली पड़े स्कूलों एवं सरकारी भवनों को आवश्यकता के अनुसार सहकारिता विभाग को हस्तांतरित करते हुए पैक्स के उपयोग हेतु कार्रवाई किए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्रों का संचालन भी पैक्स के माध्यम से कराए जाने की बात कही। उन्होंने कहा कि इसके लिए बेरोजगार फार्मासिस्टों की जानकारी राज्य की फार्मासिस्ट काउंसिल से लेकर फार्मासिस्टों को इससे जोड़ने के साथ ही ड्रग लाईसेंस उपलब्ध कराया जाए। साथ ही सभी सरकारी चिकित्सालयों में प्रधानमंत्री जन औषधि केन्द्रों के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि जिला सहकारी विकास समितियों की लगातार समीक्षाएं आयोजित कर इसे बढ़ावा देने के लिए कार्य किया जाए। प्रदेश के कॉमन सर्विस सेंटरों को भी पैक्स के माध्यम से संचालित किया जाए। पैक्स को मल्टी स्टेट संघों की सदस्यता लेने हेतु भी प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि पैक्स को मजबूत करके हम प्रदेश के आम आदमी को मजबूत कर सकते हैं, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों में आर्थिकी को बढ़ाने की अपार सम्भावनाएं हैं। इससे होने वाला लाभ सीधे समिति के सदस्यों में बराबर वितरित होता है। इससे जो भी लाभ होगा वह सीधे पैक्स के सदस्य यानि उससे जुड़े किसान और आमजन को होगा।
इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव  आनन्द बर्द्धन, सचिव  दिलीप जावलकर, डॉ. बी.वी.आर.सी. पुरूषोत्तम एवं दीपेन्द्र कुमार चौधरी निबंधक सहकारिता आलोक पांडे अपर निबंधक आनंद शुक्ल ईरा उप्रेती, संयुक्त निबंधक एमपी त्रिपाठी, प्रबंध निदेशक प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन मानसिंह सैनी सहित अन्य उच्चाधिकारी उपस्थित थे।

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