पौड़ी के रामलीला ग्राउंड में आज जिलाधिकारी डॉक्टर आशीष चौहान की अध्यक्षता में इगास सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिस में उत्तराखंड पत्रकार यूनियन पौड़ी के अध्यक्ष राकेश रमन शुक्ला वह व्यापार सभा के पदाधिकारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में जिलाधिकारी डॉक्टर आशीष चौहान ने सभी को इगास पर्व की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा कि अपनी लोक संस्कृति को हमेशा संजोए रखना चाहिए। उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राज्यसभा सांसद अनिल बलूनी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके अथक प्रयासों से अब उत्तराखंड में इगास का पर्व फिर से मनाया जा रहा है इस दौरान उत्तराखंड पत्रकार यूनियन पौड़ी के अध्यक्ष राकेश रमन शुक्ला ने भी सभी को इगास पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि धीरे-धीरे उत्तराखंड के लोग अपने लोग पर्वों को भूलकर दूसरे पर्वों की ओर आकर्षित होते दिखाई दे रहे हैं जो की बिल्कुल भी सही नहीं है।इसी के लिए हम सभी के सहयोग से आज इगास पर्व को पौड़ी रामलीला ग्राउंड में बड़े ही हर्षोल्लाह के साथ मना रहे हैं। और आगे भी इसी तरह इस पर्व को मनाया जाएगा।इस दौरान महिलाओं द्वारा विभिन्न रंगारंग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इस मौके पर उत्तराखंड पत्रकार यूनियन के अध्यक्ष राकेश रमन शुक्ला पौड़ी व्यापार सभा के कोषाध्यक्ष कुलदीप गोसाई DDO पौड़ी राज्यसभा सांसद के प्रतिनिधि संजय बलूनी सामाजिक कार्यकर्ता नमन चंदोला सहित अन्य लोग मौजूद रहे
पौड़ी/पाबौ(पहाड़ ख़बरसार)खेल महाकुंभ 2023 का विकास खंड पाबौ में आज शुभारंभ हो गया। खेल महाकुंभ का शुभारंभ ब्लॉक प्रमुख पाबौ डॉ रजनी रावत व खंड विकास अधिकारी पाबौ तेग सिंह रावत द्वारा किया गया। खेल महाकुंभ के मद्देनजर विकास खंड पाबौ में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन पाबौ के खूंडेश्वर मैदान में आयोजित किया जा रहा है।
क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी भगवान सिंह बिष्ट ने बताया की खेल महाकुंभ के मद्देनजर विकास खंड पाबौ में कबड्डी, खो-खो, लंबी कूद,गोला फेंक, रेस आदि प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है उन्होंने कहा खेल प्रतियोगिता में अंडर 14, अंडर 17 और अंडर 19 कैटेगरी के खिलाड़ी प्रतिभाग कर रहे है। जिसमें ग्राम सभा स्तरीय प्रतियोगिताओं से चयनित खिलाड़ी प्रतिभाग कर रहे हैं।
उन्होंने बताया की प्रतियोगिता में प्रथम आने वाली प्रतिभागियों को ₹500,द्वितीय आने वाले प्रतिभागियों को 400 व तृतीया आने वाले प्रतिभागियों को 300 रूपये की धनराशि प्रोत्साहन के रूप में भेंट की जा रही है। इसके साथ ही विजेता प्रतिभागियों को मेडल व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यहां से निकलने वाले युवा जिला स्तर पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाएंगे
देहरादून(पहाड़ ख़बरसार)आज राठ जन विकास समिति की कार्यकारिणी की बैठक अध्यक्ष शेखरानंद रतूड़ी की अध्यक्षता मे दून विश्वविद्यालय के खेल मैदान मे सम्पन हुई। जिसमे आगामी २३ नवंबर २०२३ को आयोजित होने वाले इगास २०२३ की तैयारियों को लेकर चर्चा हुयी एवं इगास के मौक़े पर प्रस्तुत होने वाले संस्कृतिक कार्यक्रम, भेला खेलने, रास्सि कस्सी (गैड़ ) खेलने की तैयारियों को भी देखा गया।
राठ जन विकास समिति द्वारा इस वर्ष भी इगास २०२३ मे मुख्य अथिति के रूप मे मा० मुख्यमंत्री उत्तराखंड, अति विशिष्ट अथिति के रूप मे पूर्व मुख्य मंत्री डॉक्टर रमेश पोखरियाल निशंक जी, उत्तराखंड के कैबिबेट मंत्री डॉक्टर धन सिंह रावत जी, सांसद गढ़वाल श्री तीरथ सिंह रावत जी, विशिष्ट अथिति के रूप मे महापौर श्री सुनील उनियाल गामा, पूर्व विधायक श्री गणेश गोडियाल जी, श्रीमती सुलेखा डंगवाल, कुलपति दून विश्वविधालय, अध्यक्ष राज्य सहकारी संघ श्री मातबर सिंह रावत जी के साथ लगभग १००० प्रवासी राठ परिवारों को आमंत्रित किया गया है।
राज्य की विरासत, संस्कृति और बिलुप्त हो रहे धरोहरो को संजोये रखने और उन्हे नई पीड़ी के को हस्तांतरित करने का प्रयास समिति द्वारा लम्बे समय से किया जा रहा है।
समिति द्वारा गत वर्ष से इगास को भव्य रूप से मनाये जाने का निर्णय लिया गया था जिसमे कर्म मे इस वर्ष भी भव्य रूप से मनाये जाने का निर्णय लिया गया है।
मा मुख्यमंत्री जी द्वारा उक्त कार्यक्रम मे प्रतिभाग करने की सहमति प्रदान कर दी गयी है।
बैठक मे वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री गोविंद सिंह रावत जी, महासचिव पुरुषोत्तम मामगईं, कोषाध्यक्ष श्री मेहरवान सिंह गुसाईं, श्रीमती बीना रतूड़ी, श्रीमती तारेश्वरी भंडारी, श्री महेश खांकरियाल जी, श्री कमलेश रतूड़ी, श्री राकेश खांकरियाल, श्री शम्भू प्रसाद मामगईं, श्री कृपाल. टम्टा, श्री रामप्रकाश खांकरियाल जी, श्री भागीरथ ढाउंडियल, श्री गुसाईं आदि उपस्थित थे।
पौड़ी/कोटद्वार(पहाड़ ख़बरसार)पौड़ी जनपद के द्वारीखाल ब्लॉक में कांडाखाल के पास बिरमोली गांव में भालू का आतंक लगातार बना हुआ है। गांव के पास जंगल में घास लेने गई 50 वर्षीय महिला पुष्पा देवी पर भालू ने हमला कर दिया, इस बीच दूसरी महिला ने भालू से अपनी साथी महिला को छुड़ाने की कोशिश की तो भालू ने महिला पर भी हमला कर दिया।
हल्ला मचाने के बाद भालू मौके से भाग खड़ा हुआ। घायल हालत में दोनो महिलाओं को कोटद्वार के बेस अस्पताल में लाया गया जहां पर उनका इलाज किया जा रहा है।
सहकारिता मंत्री डॉ धन सिंह रावत ने आज शुक्रवार को वर्चुअल माध्यम से सभी राज्य सहकारी बैंक के एमडी और जिलों के सचिव/महाप्रबंधक की समीक्षा बैठक में निर्देश देते हुए कहा कि एनपीए वसूली में कड़ाई से पालन किया जाये। उन्होंने कहा कि जिन्होंने एनपीए ऋण जमा नहीं किया है, वसूली के लिए अभियान चलाया जाए।
समीक्षा बैठक में सहकारिता सचिव डॉ वीबीआरसी पुरुषोत्तम ने निबंधक सहकारिता और एमडी राज्य सहकारी बैंक को एनपीए वसूली के लिए बकायेदारों को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। बैठक में राज्य सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक श्री मान सिंह सैनी ने बताया कि इसको वसूलने के लिए पूर्व में नोटिस जारी किए गए थे, शीघ्र जमा न करने की स्थिति में कुर्की की कार्यवाही की जायेगी।
सहकारिता मंत्री डॉ रावत ने सचिव को निर्देश दिए कि जो बहुउद्देशीय सहकारी समितियां चुनाव के लिए पात्र नहीं हैं उनकी सूची तुरंत बनाई जाए। और कारण लिखा जाए कि वह पात्र क्यों नहीं हैं। उन्होंने नए सहकारी सदस्य बनाने के लिए अधिकारियों से प्रगति भी जानी। मंत्री ने 30 नवंबर तक 2 लाख नए सदस्यों को बनाने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी 670 एमपैक्स को चुनाव लायक बनाया जाये।
सचिव डॉ. पुरुषोत्तम ने मंत्री को जानकारी दी कि, राज्यपाल उत्तराखंड ने आज उत्तराखंड सहकारिता विभाग की समीक्षा मीटिंग में अब तक हुए कार्यों की सराहना की है। कहा है कि, जिन एमपैक्स ने राज्य में अच्छा कार्य किया है उनकी कार्यशाला राजभवन में आयोजित होगी। सहकारिता विभाग की भविष्य की योजनाओं का खाका भी कार्यशाला में रखा जाएगा। समीक्षा बैठक में निबंधक सहकारिता श्री आलोक कुमार पाण्डेय, एमडी श्री मान सिंह सैनी, राज्य सहकारी बैंक के जीएम श्री दीपक कुमार, जीएम टिहरी संजय रावत, जीएम हरिद्वार श्री विश्व विजय सिंह, जीएम देहरादून श्री सीके कमल सहित सभी जीएम वर्चुअल से समीक्षा बैठक में जुड़े।
पौड़ी(पहाड़ ख़बरसार) पौड़ी तहसील क्षेत्र की एक महिला को ब्लैक मेलरो के चंगुल में फंसकर लाखो रुपए के गहने गवाने पड़े हैं मामला तहसील क्षेत्र से जुड़ा है दरअसल 12 नवंबर को अपने ससुराल से लापता चल रही महिला की गुमशुदगी रिपोर्ट परिजनों ने 14 नवंबर को तहसील प्रशासन को दी अभी प्रशासन द्वारा मामले की पड़ताल की ही जा रही थी की लापता महिला अचानक अपने ससुराल वापस लौट आई महिला ने बताया कि ब्लैक मेलर उसे उसकी आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने की धमकी दे रहे थे और इसकी एवज में ही महिला से 50 हजार रुपए की मांग की जा रही महिला अपने कीमती गहने लेकर दिल्ली तक जा पहुंची जहां एक ऑटो ड्राइवर को उसने कीमती गहने दे डाले और फिर उसे सुसराल वापस लौट जाने के लिए कहा गया महिला के ससुर ने बताया की 50 हजार के गहने उन्हे गवाने पड़े हैं जिस पर अब तहसील प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
देहरादून(पहाड़ ख़बरसार) सूबे में अब तक 62 लाख से अधिक लोगों के आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा आईडी) तथा 54 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाये जा चुके हैं। राज्य के मैदानी व पर्वतीय क्षेत्रों में आयुष्मान भव अभियान के तहत आयुष्मान कार्ड व आभा आईडी बनाई जा रही है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा अभियान की हर स्तर पर निगरानी की जा रही है ताकि मार्च 2024 तक प्रदेश में शत-प्रतिशत लोगों की आभा आइडी तथा पांच वर्ष से अधिक आयु वर्ग के लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सके।
राज्य में चिकित्सा सेवाओं के सुदृढ़ीकरण एवं सुलभता को लेकर राज्य सरकार कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग मार्च 2024 तक प्रदेश में शत-प्रतिशत लोगों की आभा आईडी व आयुष्मान कार्ड बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में जुटा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक 62 लाख 69 हजार 338 लोगों के आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा आईडी) बनाये जा चुके हैं। जिनमें से 4 लाख 3 हजार 105 आभा आईडी विगत 17 सितम्बर 2023 से संचालित ‘आयुष्मान भव अभियान’ के तहत बनाई गई हैं। देहरादून जनपद में अबतक कुल 1318990 आभा आईडी बनाई गई हैं। जबकि नैनीताल में 727771, हरिद्वार 1027120, ऊधमसिंह नगर 787596, पौड़ी गढ़वाल 456124, अल्मोड़ा 351181, टिहरी गढ़वाल 360786, पिथौरागढ़ 287832, चमोली 244178, बागेश्वर 147535, चम्पावत 168874, उत्तरकाशी 204927 तथा रूद्रप्रयाग जनपद में 135138 आभा आईडी बनाई गई हैं, जबकि राष्ट्रीय पोर्टल पर तैयार 51286 आभा आईडी का चिन्हिकरण किया जा रहा है।
इसी प्रकार राज्य में अब तक 54 लाख 38 हजार लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाये जा चुके हैं। जिनमें से 2 लाख 12 हजार 920 आयुष्मान कार्ड आयुष्मान भव अभियान के अंतर्गत बनाये गये हैं। अल्मोड़ा जनपद में अब तक कुल 2 लाख 72 हजार आयुष्मान कार्ड बनाये जा चुके हैं। इसी प्रकार बागेश्वर में 1 लाख 20 हजार, चमोली 2 लाख 12 लाख, चम्पावत 1 लाख 23 हजार, देहरादून 11 लाख 15 हजार, हरिद्वार 9 लाख 13 हजार, नैनीताल 5 लाख 17 हजार, पौड़ी गढ़वाल 3 लाख 92 हजार, पिथौरागढ़ 2 लाख 37 हजार, रूद्रप्रयाग 1 लाख 28 हजार, टिहरी गढ़वाल 3 लाख 39 हजार, ऊधमसिंह नगर 8 लाख 84 हजार तथा उत्तरकाशी जनपद में 1 लाख 86 हजार लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाये जा चुके हैं। आयुष्मान भव अभियान प्रदेश में निरंतर चलाया जा रहा है, जिसकी मॉनिटिरिंग स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार की जा रही है। अभियान के तहत प्रत्येक जनपद की सभी चिकित्सा इकाईयों में लोगों के आयुष्मान कार्ड व आभा आईडी बनाई जा रही है, इसके साथ ही दोनों प्रकार के कार्डों के बनाने को लेकर आम लोगों को भी जागरूक किया जा रहा है।
बयान– राज्य सरकार ने मार्च 2024 तक प्रदेश में शत-प्रतिशत लोगों की आभा आईडी व आयुष्मान कार्ड बनाने का लक्ष्य तय किया है। अब तक प्रदेश में 62 लाख लोगों की आभा आईडी व 54 लाख लोगों के आयुष्मान कार्ड बनाये जा चुके हैं। तय लक्ष्य समय पर हासिल हो, इसके लिये स्वास्थ्य विभाग प्रयासरत है।-डॉ. धन सिंह रावत, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री, उत्तराखंड सरकार।
अल्मोडा(पहाड़ ख़बरसार)क्रिकेट स्टार महेन्द्र सिंह धोनी आज अल्मोडा जनपद के विकास खण्ड के लमगड़ा में अपने पैतृक गाँव ल्वाली पहुंचे।इस दौरान उनके गांव ल्वाली में उनके परिवार एव ग्रामीणों स्वागत किया साथ माही ने पैतृक गांव में अपने इष्टदेव की पूजा अर्चना की और परिवार जनों के साथ फोटो खिंचवाई और पैतृक गांव में अपने घर का जायजा भी लिया और अपने साथियों से मुलाकात की तथा प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लिया एवं चाय भी पी।टीम इंडिया के पूर्व कप्तान क्रिकेटर महेंद्र सिंह धौनी इन दिनों उत्तराखंड के कुमाउं दौरे पर है। धोनी अपनी पत्नी साक्षी के साथ आज अल्मोड़ा जिले के जैती तहसील स्थित अपने पैतृक गांव ल्वाली पहुंचे। धोनी के गांव पहुंचते ही लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। इस दौरान धोनी व उनकी पत्नी सबसे पहले अपने पैतृक आवास पर पहुंचे। जिसके बाद उन्होंने गांव में स्थित गोल्यूज, हरज्यू व अपनी कुलदेवी के मंदिर में पूजा अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान महेंद्र सिंह धोनी ने गांव के लोगों के साथ अपनी पुरानी यादों को ताजा किया। इस दौरान धोनी के साथ उनके रिश्तेदारों व ग्रामीणों ने जमकर सेल्फी व तस्वीरें ली। महेंद्र सिंह धोनी 20 साल बाद अपने गांव पहुंचे। इससे पहले वह 2003 में गांव आए थे।
पौड़ी(पहाड़ ख़बरसार)उत्तराखंड के पौड़ी जिले के थलीसैंण विकासखंड के अंतर्गत कन्डारस्यू पट्टी के बूंखाल में माँ काली का प्रसिद्ध मंदिर स्थित है। माँ काली पौड़ी के राठ क्षेत्रवासियों की आराध्य देवी है। इस मंदिर का कोई प्रमाणिक इतिहास उपलब्ध नही है। इस क्षेत्र के बड़े बुजुर्गों के अनुसार इस मंदिर का निर्माण 18 वी शताब्दी में हुवा है। यह देवी बूंखाल कालिका के नाम से जग प्रसिद्व है ।
इस वर्ष 2 दिसम्बर को बूंखाल कालिका मेला होना सुनिश्चित हुआ है। मेला सीमित के अध्यक्ष गजेंद्र सिंह व सचिव विनोद गोदियाल ने बताया कि इस वर्ष मां कालिका के मंदिर में 2 दिसंबर को भव्य मेला का आयोजन करना सुनिश्चित हुआ है उन्होंने बताया कि समिति द्वारा मेरे को शांति पूर्वक का व भव्य रूप से संपन्न करवाने हेतु कार्य शुरू कर दी गई है। उन्होंने बताया कि मेले में जाकर सम्राट प्रीतम भरतवार्ण अपने संगीत से भक्तगणों का मन मोहेगें, तो स्थानीय विधायक और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री डॉ धन सिंह रावत मेले में मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद होंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी हजारों की संख्या में भक्ति मां की दर्शन करने के लिए मंदिर परिसर में पहुंचेंगे।
क्यों हुई मेले में बलि प्रथा समाप्त
बूंखाल काली मंदिर में प्रतिवर्ष मार्गशीष शुक्ल पक्ष में पशुबलि का बहुत बड़ा मेला लगता था। 2014 में पशुबलि बंद होने के बाद यह मेला ,सात्विक मेले में बदल दिया गया। तबसे डोली यात्रा, कलश यात्रा और भव्य पूजन अर्चना इस मेले की पहचान बन गई है। बूंखाल देवी मेले में पहले बकरों और भेड़ों की बलि दी जाती थी। और एक दो नर भैसों की बलि भी दी जाती थी। धीरे धीरे मेला व्यापक हो गया। और बाद में उत्तराखंड में बलि प्रथा बन्द कर दी गई। मेले से पूर्व मंदिर के पुजारी बूंखाल की खाड़ में बिंदी चढ़ाकर कालीचक्र बनाते हैं। स्थानीय रीति रिवाजों के अनुसार मेले में 3 या 5 दिन पूर्व से कालिका माता का मंडाण शुरू हो जाता है । बूंखाल काली मंदिर में पुजारी ,गोदियाल जाती के लोग होते हैं।
बूंखाल कालिका की कहानी
किंवदंतियों के अनुसार बूंखाल कालीका माता का अवतरण 400 साल पूर्व पौड़ी जिले के कन्डारस्यूं पट्टी के चौपड़ा गावँ में एक शिल्पकार परिवार में लोहार वंश की एक कन्या के रूप में हुआ था। एक मेंडला के जंगल मे गाय चराते हुए, बच्चों ने खेल खेल में इस कन्या को गड्ढे में दबा कर ऊपर से मिट्टी डाल दी। दो तीन दिन खोजबीन के बाद इस कन्या का कहीं भी पता नही चला, तो बाद में वह कन्या अपने माता पिता को स्वप्न में आई और उसने बताया कि उसे मेंडला के जंगल मे गड्ढे में दबाया है । अब वह कालिका बन चुकी है , और उसे बूंखाल की भूमि में काली रूप में स्थापित किया जाय। कहा जाता है कि इस कन्या की मंगनी ( सगाई ) ग्राम नलई के कल्या लोहार बंश में हो चुकी थी, इसलिए कन्या ने बूंखाल चुना, वहां से नलई गावँ पर भी नजर पड़ती है।
जबकि कुछ लोगो की मान्यता है, कि मेंडला में हरियाली देवी का वास होने के कारण कालिका को वह स्थान छोड़ना पड़ा ।
मान्यता है, कि माँ काली के कहने पर देवी की स्थापना एक गड्ढे में कई गई है। जहां से किसी भी विपत्ती आने से पूर्व वो क्षेत्रवासियों को आवाज देकर सतर्क कर देती थी । कहते हैं गोरखा आक्रमण के समय देवी ने आवाज देकर सूचना दी तो । गोरख़ालियों ने मूर्ति की गर्दन काटकर अपने साथ नेपाल ले गए और धड़ को उसी गड्ढे में उल्टा दबा दिया। कहते हैं तबसे देवी का आवाज देना बंद हो गया ।
पौड़ी(पहाड़ ख़बरसार)सनातन परंपरा में अंधकार को दूर कर प्रकाश फैलाने वाले दीपावली महापर्व का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. धनतेरस से लेकर भाई दूज तक मनाए जाने वाली दिवाली आखिर हर साल क्यों मनाई जाती है और क्या है इससे जुड़ी मान्यता, जानने के लिए जरूर पढ़ें ये लेख.
हिंदू धर्म में कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी तिथि से लेकर कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की द्वितीया तक दीपावाली या फिर कहें दिवाली के पंचमहापर्व को मनाए जाने का विधान है. दीयों से जुड़ा यह पर्व अब चंद दिनों के बाद आने वाला है. अंधेरे पर प्रकाश की विजय से जुड़े इस पर्व को लेकर अलग-अलग धर्मों में अलग-मान्यताएं हैं. मसलन कोई इसे शुभ और लाभ के देवता भगवान श्री गणेश और धन की देवी मां लक्ष्मी की पूजा के लिए सबसे ज्यादा फलदायी मानता है तो कोई इसे अपने आराध्य के निर्वाण या फिर उसकी वापसी की खुशी में मनाता है. दिवाली पर्व से जुड़ी धार्मिक मान्यताओं को आइए विस्तार से जानते हैं.
हिंदू धर्म में क्यों मनाया जाता है दिवाली का पर्व
हिंदू धर्म से दिवाली के पर्व को मनाए जाने के पीछे कई प्रकार की कथा और मान्यताएं जुड़ी हुई हैं. इनमें से सबसे ज्यादा प्रचलित मान्यता है कि कार्तिक मास की अमावस्या के दिन ही भगवान राम लंका विजय करने के बाद अयोध्या नगरी लौटे थे. जिनके आगमन पर अयोध्यावासियों ने घी के दीये जलाकर उनका स्वागत किया था. मान्यता यह भी है कि इसी दिन समुद्र मंथन के बाद धन की देवी मां लक्ष्मी का प्राकट्य हुआ था. दिवाली को लेकर कुछ लोगों की मान्यता है कि इसी दिन पांडव 12 वर्ष का वनवास काटकर वापस लौटे थे, जबकि कुछ लोग इसे राजा विक्रमादित्य के राजतिलक का दिन मानते हैं.
हनुमान पूजा : 11 नवंबर 2023, शनिवार
नरक चौदस / दीपावली : 12 नवंबर 2023, रविवार
गोवर्धन पूजा / अन्नकूट : 14 नवंबर 2023, मंगलवार
भाई दूज : 15 नवंबर 2023, बुधवार
बौद्ध धर्म से जुड़े लोग क्यों मनाते हैं दिवाली
दिवाली को लेकर बौद्ध धर्म से जुड़ी मान्यता है कि इसी दिन उनके आराध्य भगवान गौतम बुद्ध 18 साल बाद अपनी जन्मभूमि कपिलवस्तु वापस लौटे थे. मान्यता है कि उनके अनुयायियों ने उस दिन उनका दीये जलाकर स्वागत किया था. तभी से इस धर्म से जुड़े लोग इस दिन अपने घर में दीये जलाकर इस पावन पर्व को मनाते हैं.
दिवाली को लेकर जैन धर्म से जुड़ी मान्यता जैन धर्म से जुड़े लोगों का मानना है कि उनके 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर दिवाली के दिन ही बिहार के पावापुरी में निर्वाण की प्राप्ति हुई थी. इसी खुशी में इस धर्म से जुड़े लोग भगवान महावीर की पूजा दीया जलाकर करते हैं. हालांकि उनके साथ लोग भगवान गणेश, लक्ष्मी और मां सरस्वती की पूजा भी करते हैं.
दिवाली को क्यों कहा जाता है पंचमहापर्व जिस दिवाली का इंतजार लोगों को पूरे साल बना रहता है, वो एक नहीं बल्कि 5 पर्वों से जुड़ा त्योहार है. जिसमें पहला धनतेरस पड़ता है, जिसमें भगवान धन्वतरि की पूजा का विधान है तो वहीं चतुर्दशी तिथि पर छोटी दिवाली मनाई जाती है. मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर राक्षस का वध किया था. इसी प्रकार दीपावली के दिन भगवान श्री गणेश, माता लक्ष्मी, कुबेर देवता, माता काली और मां सरस्वती की पूजा का विधान है. चौथे दिन गोवर्धन पूजा और पांचवें दिन भाई दूज मनाया जाता है।